Kargil Story: शहीद पिता से कभी नहीं मिली थी अपराजिता, उनकी चिटि्ठयां पढ़ी तो लगा उन्हें देख लिया, दुनिया को पिता से मिलवाने के लिए लिखी उनपर किताब

करिगल में पिता शहीद हुए तो अपराजिता मां के गर्भ में थी। पिता को देखने का उसे कभी मौका नहीं मिला जब पिता की  चिटि्ठयां पढ़ी  उनके फोटो  देखे तो लगा जैसे पिता से मुलाकात हुई है।यही वजह थी कि उसने सोचा जैसे  इन चिटि्ठयों ने उसे पिता से मिलने  जैसा एहसास दिया है  वैसे ही  वह दुनिया को अपने शहीद पिता से मिलवाए। शहीद मेजर पद्मपनी आचार्य आज जिंदा होते तो इस साल अपना 50वां बर्थडे मना रहे होते।ये साल उनके परिवार के लिए इसलिए ज्यादा खास है।इसी साल जनवरी में अपराजिता ने पापा पर एक कॉफीटेबल बुक तैयार करने का फैसला किया।लॉ स्टूडेंट  अपराजिता  जब इंटर्नशिप  ब्रेक  के  लिए अप्रेल में घर आई तो इस किताब के काम पर जुट गई।मई और जून मिलाकर कुछ डेढ़ महीने  का समय मिला और  उसने पूरी बुक  तैयार 

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हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में 9 सितंबर 1974 को विक्रम बत्रा का जन्म हुआ. 1997 में विक्रम बत्रा को मर्चेंट

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