VIDEO: US नेवी का Sea Hunter Drone कितना ताकतवर भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों से

मानव रहित वाहनों की दिशा में वैज्ञानिकों ने नई छलांग लगाई है। ड्रोन विमानों और चालक रहित कारों के बाद अब वैज्ञानिकों ने बिना कप्तान और क्रू के चलने वाला पोत बनाया है। पेंटागन में सोमवार को बिना चालक के चलने में सक्षम 132 फुट का पोत Class III unmanned surface vessel (USV) जिसका नाम Sea Hunter Drone दिखाया गया। यह अकेले 10 हजार समुद्री मील तक की यात्रा करने में सक्षम है।

इसकी सहायता से रडार से बचने में सक्षम पनडुब्बियों को खोजना संभव हो सकता है। US defense research agency (DARPA) नौसेना के साथ मिलकर अगले दो सालों में इसका परीक्षण कर रही थी । सैन डियागो के तट पर होने वाले परीक्षण में यह जहाज अन्य जहाजों से बहुत अच्छे से पेश आया था । साथ ही बना किसी कप्तान के होने के बाद भी इसने सरे ऑपरेशन को तय समय सीमा के अंदर किया। अभी तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है की कब तक किसको शामिल किया जायेगा, लेकिन जल्द ही US Navy में इसको जगह मिलने वाली हैं। अब तक किसी भी देश के पास Sea Hunter Drone जैसे टेक्नोलॉजी वाला पोत नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार US Navy में Sea Hunter Drone के शामिल होते ही इसकी ताकत तीन गुना हो जाएगी।

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DARPA के प्रवक्ता जेरेड बी एडम्स ने कहा कि यह रिमोट संचालित जहाज नहीं, पूर्णत: स्वचालित जहाज है। इसे ‘Sea Hunter Drone ‘ का नाम दिया गया है। यह रडार, सोनार, कैमरा और जीपीएस के जरिये संचालित होगा। सैन्य प्रमुखों के अलावा वाणिज्यिक पोत परिवहन से जुड़े लोग भी इसके परीक्षण पर नजर बनाए हुए हैं। पोत परिवहन से जुड़ी कंपनियां परिचालन लागत कम करने और समुद्री लुटेरों वाले इलाकों से बचने के लिए मानव रहित जहाजों के पक्ष में हैं।

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करंज मेक इन इंडिया के तहत बनाई गई स्वदेशी पनडुब्बी है. अत्याधुनिक तकनीक और सटीक निशाने के दम पर समंदर में करंज चीन और पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा सकता है.

इसका निर्माण मझगांव डॉकयार्ड ने फ्रांस के सहयोग से किया हैं. आधुनिक तकनीक से बनी यह पनडुब्बी कम आवाज से दुश्मन के जहाज को चकमा देने में माहिर है.

इस स्वदेशी पनडुब्बी में तारपीडो जैसे हथियार भी लगे है जो दुश्मन के जहाज या पनडुब्बी को मार गिराने में सक्षम हैं. साथ ही इसमेें दुश्मन के इलाके की निगरानी करने के लिए यंत्र लगे हुए हैं.

यह पनडुब्‍बी अभी लॉन्‍च हुई है और उम्मीद है इसे अगले साल तक नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा.

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इस क्लास की पहली पनडुब्बी कलवरी को पिछले महीने ही नौसेना में शामिल किया गया था. दूसरी पनडुब्बी खंदेरी का अभी ट्रायल चल रहा हैं. ऐसी 6 पनडुब्बी मझगांव डॉकयार्ड में बनेगी जो 2020 तक नौसेना में शामिल हो जाएगी.

हिन्द महासागर में बढ़ती चुनातियों को देखते हुए नौसेना के पास दर्जन भर ही पनडुब्बी हैं. इनमें से आधे से अधिक अपनी ज़िंदगी पुरी कर चुके है, लेकिन किसी तरह उनको अपग्रेड कर काम चलाया जा रहा हैं. ऐसे में जितना जल्द ये पनडुब्बी का लॉन्‍च होना नौसेना के लिए बहुत मायने रखता हैं. इन सबके के बूते ही भारत हिंद महासागर मे चीन को जवाब दे पाएगा.

करंज टारपीडो और एंटी शिप मिसाइल से हमला करती है. रडार की पकड़ में नहीं आती, समंदर से जमीन पर और पानी के अंदर से सतह पर हमला करने में सक्षम है.

67.5 मीटर लंबी, 12.3 मीटर ऊंची और 1565 टन वजन वाली इस पनडुब्बी में ऑक्सीजन भी बनाया जा सकता है. युद्ध की स्थिति में यह दुश्मन के क्षेत्र से चकमा देकर निकलने में सक्षम है.

इससे पहले पहली स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस कलवरी को 14 दिसंबर, 2017 को और दूसरी पनडुब्बी खांदेरी को 12 जनवरी 2017 को लॉन्‍च किया गया था.

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