Kargil Story: शहीद पिता से कभी नहीं मिली थी अपराजिता, उनकी चिटि्ठयां पढ़ी तो लगा उन्हें देख लिया, दुनिया को पिता से मिलवाने के लिए लिखी उनपर किताब

करिगल में पिता शहीद हुए तो अपराजिता मां के गर्भ में थी। पिता को देखने का उसे कभी मौका नहीं मिला जब पिता की  चिटि्ठयां पढ़ी  उनके फोटो  देखे तो लगा जैसे पिता से मुलाकात हुई है।यही वजह थी कि उसने सोचा जैसे  इन चिटि्ठयों ने उसे पिता से मिलने  जैसा एहसास दिया है  वैसे ही  वह दुनिया को अपने शहीद पिता से मिलवाए।

शहीद मेजर पद्मपनी आचार्य आज जिंदा होते तो इस साल अपना 50वां बर्थडे मना रहे होते।ये साल उनके परिवार के लिए इसलिए ज्यादा खास है।इसी साल जनवरी में अपराजिता ने पापा पर एक कॉफीटेबल बुक तैयार करने का फैसला किया।लॉ स्टूडेंट  अपराजिता  जब इंटर्नशिप  ब्रेक  के  लिए अप्रेल में घर आई तो इस किताब के काम पर जुट गई।मई और जून मिलाकर कुछ डेढ़ महीने  का समय मिला और  उसने पूरी बुक  तैयार  कर ली।इस काम में बुआ और मम्मी ने भी अपराजिता की मदद की।

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अपराजिता कहती है मैंने अपने दोस्तों को एक बार पापा की चिट्‌ठी पढ़कर सुनाई थी।पापा इतना अच्छा लिखते  थे कि लगता है  सबकुछ  उनकी  आंखों के सामने चल रहा है।मेरे दोस्त मुझसे और चिटि्ठयां पढ़ने को कहते थे। पापा के इस टैलेंट को मैं दुनिया के सामने लाना चाहती थी।वह  कहतीं हैं करगिल वॉर पहला था जिसे लोगों ने घरों में बैठकर टीवी पर देखा।लेकिन उनकी  जनरेशन के बच्चे  अब भी उसके बारे में  ज्यादा  नहीं  जानते।वह कहती है, कई बार प्रोग्राम्स  में जाती थी तो वहां देखती थी कि  शहीदों के परिवार वाले कितना  कुछ बताते  हैं उनके  बेटे  और  पति  के बारे में। लेकिन मेरे पापा के बारे में मेरे परिवार ने कभी कुछ नहीं बताया। वो तो 19 साल अपनी दुख संभालने और मुझे बड़ा करने में ही लगे रहे। इसलिए अब ये मेरी जिम्मेदारी थी।

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इस किताब का नाम है अवर बबलू, मेजर पी आचार्य, महावीर चक्र और उसमें  मेजर पी आचार्य  के  बचपन  से  लेकर शहादत तक की सारी  बातें  शामिल की गई हैं।फोटो के जरिए  उनकी  जिंदगी  के सभी  फेज दिखाए  गए हैं।मेजर आचार्य के कोर्समेट्स,  दोस्तों ने उनके बारे में अपने  एक्सपीरियंस भी लिखे हैं।लेकिन जो  अपराजिता के लिए सबसे खास  है वह है एक  चिट्‌ठी  जिसमें मेजर आचार्य  अपनी पत्नी से  उनके  होने वाले  बच्चे यानी  अपराजिता के  बारे में पूछ  रहे हैं मेजर आचार्य अपराजिता को मोगली  कहकर  बुलाते हैं  और पत्नी  चारूलता  से कहते  हैं  कि अपना  अच्छे से ख्याल रखें ये शायद उनकी आखिरी चिट्‌ठी है। इस किताब की  लांचिंग भी अपराजिता के लिए बेहद खास है।वह कहती हैं कल जब  मैं  पापा की चिटि्ठयां  पढ़ रही थी  तो पीछे  प्रोजेक्टर पर पापा की तस्वीरें चल रहीं थी।वहां बैठे लोगों की आंखें  भीगी हुईं थी और  जब  मेरा पढ़ना पूरा  हुआ तो वो बोले हमें तुम नहीं मेजर आचार्य महसूस हो रहे थे।

अपराजिता ने इसी साल पापा की एक गैलरी घर में तैयार की है।इसमें पापा की यूनिफॉर्म,  मेडल्स,  कैप,  सेरिमोनियल, नेमटैग रखे हैं।यही नहीं पापा का  फेवरेट माउथऑर्गन,  नाइफ  कलेक्शन और घड़ी भी यहां रखी है।

 

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