सातवीं पास मां, तीन बार दसवीं फेल प‍िता का बेटा है यह आईपीएस, आधी तनख्‍वाह कर देता है दान

शिवदीप की कहानी सीधा बॉलीवुड की फिल्मों से आई है. ना जाने कितनी फिल्मों में ऐसे पात्र रचे गये हैं. जब शिवदीप पटना आए थे तब शहर गुंडों से त्रस्त था. तमंचे वाले तो थे ही. शरीफ गुंडे भी थे. दवाई वाले. जो बंदूक नहीं रखते थे. पर दवाईयों का अकाल पड़ा देते थे शहर में. ब्लैक मार्केटिंग कर के. दारु की दुकानें जरूरत से ज्यादा खुल गई थीं. बिना लाइसेंस के. दस महीनों में शिवदीप ने शहर को रास्ते पर ला दिया. और ये सब कुछ स्टाइल में होता था. ये नहीं कि पुलिस गई और गिरफ्तार कर के लाई. नये तरीके आजमाये जाते थे. कभी शिवदीप बहुरुपिया बन के जाते.

कभी लुंगी-गमछा पहन के पहुंच जाते. कभी चलती मोटरसाइकिल से जंप मार देते. कभी चलती मोटरसाइकिल के सामने खड़े हो जाते.

पटना की लड़कियों में शिवदीप का क्रेज था. प्रेम था. शादी का ही मसला नहीं था. लड़कियां ऐसे भी प्रेम करती थीं. और जब लड़कियां ऐसे ही प्रेम करती हैं किसी से तो उस इंसान के बारे में आप अंदाजा लगा सकते हैं. पटना कार्यकाल के दौरान शिवदीप ने मनचलों पर को खूब सबक सिखाया. लड़कियां खुद को सुरक्षित महसूस करने लगी थी. छात्राओं के मोबाइल में उनका नंबर जरुर होता था. एक बार पटना में शहर के बीचो-बीच तीन शराबी एक लड़की को छेड़ रहे थे. उसने शिवदीप को फोन किया. उन्होंने लड़की को बचाकर मनचलों को गिरफ्तार कर लिया.

पटना के मोबाइलों में शिवदीप का नंबर तैरता था. लड़कियों की एक कॉल पर शिवदीप अपनी बाइक से दनदनाते पहुंच जाते थे मजनुओं की धुनाई करने. पटना में लहरिया कट में बाइक चला लड़कियों को परेशान करने वाला गैंग बहुत सक्रिय था. इंजीनियरिंग, मेडिकल की तैयारी के नाम पर लड़के जमे रहते थे. और बाइक लेकर लड़कियों का पीछा करते रहते. वीमेन कॉलेजों के बाहर खड़े होकर फब्तियां कसते. सीने पर हाथ मार के भाग जाते. शिवदीप ने सबको रास्ते पर लाया. जब शिवदीप का पटना से ट्रांसफर हुआ तो लड़कियां रास्ता रोके खड़ी थीं. लोग जाने नहीं दे रहे थे.

फिर जब शिवदीप रोहतास के एसपी थे तब एक बार इनकी जान जाने की भी नौबत आ गई थी. रविवार का दिन था. लोग घरों में थे. माइनिंग माफिया घात लगाये बैठा था. क्योंकि शिवदीप अवैध खनन की मशीनें जब्त करने निकले थे. सब कुछ पहले से तय था. पहले माफिया परिवारों के लोग शिवदीप के सामने आये. औरतें और बच्चे. और फिर शिवदीप पर फायरिंग होने लगी. 30 राउंड फायरिंग हुई. पर उनको अंदाजा नहीं था.


कुछ देर बाद शिवदीप खुद जेसीबी मशीन चलाकर अवैध खनन का सारा जुगाड़ तहस-नहस कर रहे थे. एक दिन में 100 स्टोन क्रशर जुगाड़ उखाड़ दिये गये. 500 लोग गिरफ्तार भी हुये थे.

 

जब शिवदीप का ट्रांसफर अररिया हुआ तो लोगों ने कहा कि पॉलिटिकल वजहों से किया गया है. पनिशमेंट पोस्टिंग है. पर दिल में जब कीड़ा रहता है, तो इंसान भूत हो जाता है. शिवदीप ने अररिया में मनरेगा घोटाले की बखिया उधेड़ दी. बहुत लोग पकड़े गये.

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