आखिर क्यों 100 साल बाद दफ़नाये गए प्रथम विश्व युद्ध के दो भारतीय सैनिक

उत्तर फ़्रांस के एक छोटे से गांव लावेन्टी में बारिश की दोपहर एक ख़ास शवदाह की तैयारी चल रही थी.

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आतंक का रास्ता छोड़ थामी थी सेना की बंदूक, आतंकी से लड़ते हुए सीना हुआ छलनी

कुलगाम (कश्मीर): इस देश की खातिर जितने भी लोग शहीद हुए हैं उनके अलग-अलग किस्से हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों

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आखिर क्यों अभ‍िषेक गौतम ने अपनी पीठ पर कारगिल में शहीद हुए 577 जवानों के नाम सहित 585 टैटू गुदवाए, जानिए इस देशभक्त की पूरी कहानी

प्‍यार को जाहिर करने का हर किसी का अपना तरीका होता है। पत्‍नी, गर्लफ्रेंड, मां या परिवार का नाम तो

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दाढ़ी कटा भेष बदल मां से मिलने गया था CID अफसर, आतंकियों ने पहचानते ही कर दिया कत्ल

जम्मू-कश्मीर पुलिस के सब-इंस्पेक्टर इम्तियाज अहमद मीर अपने माता-पिता से मिलने को इतने बेकरार थे कि उन्होंने आतंकियों को चकमा

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सातवीं पास मां, तीन बार दसवीं फेल प‍िता का बेटा है यह आईपीएस, आधी तनख्‍वाह कर देता है दान

शिवदीप की कहानी सीधा बॉलीवुड की फिल्मों से आई है. ना जाने कितनी फिल्मों में ऐसे पात्र रचे गये हैं.

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दो बैचमेट की कहानी : एक ओलिंपिक मेडल और मोदी सरकार में मंत्री, दूसरा कथित जासूस

पाकिस्तान में कथित जासूसी के आरोप में गिरफ्तार भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की कहानी अजीब है। कम ही लोग जानते

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कौन है मार्शल अर्जन सिंह, क्यों मनाया जाएगा उनके जन्म दिन पर National Aviation Day

राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर ने वाणिज्य व उद्योग और नागरिक विमानन मंत्री सुरेश प्रभु को पत्र लिखकर 15 अप्रैल को

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दादा, पिता के बाद अब बेटी भी इंडियन आर्मी में, पढ़िए जम्मू की जाबाज Sunia Chid की कहानी

27 फरवरी 2018 को भारतीय सेना ने आधिकारिक तौर पर SSCW(Tech)-21 Course के लिए मेरिट सूची जारी की।Sunia Chib ने

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अफसर जिसने हाथ पर बनवा रखा है “Saving Wild Tigers” नाम का Tattoo

Saving Wild Tigers: ये वही जंगल है, जहां मैं पैदा हुआ, पला-बढ़ा। इसकी ऊबड़-खाबड़ देह पर दौड़ता रहा। सैकड़ों बार

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Kargil Story: शहीद पिता से कभी नहीं मिली थी अपराजिता, उनकी चिटि्ठयां पढ़ी तो लगा उन्हें देख लिया, दुनिया को पिता से मिलवाने के लिए लिखी उनपर किताब

करिगल में पिता शहीद हुए तो अपराजिता मां के गर्भ में थी। पिता को देखने का उसे कभी मौका नहीं मिला जब पिता की  चिटि्ठयां पढ़ी  उनके फोटो  देखे तो लगा जैसे पिता से मुलाकात हुई है।यही वजह थी कि उसने सोचा जैसे  इन चिटि्ठयों ने उसे पिता से मिलने  जैसा एहसास दिया है  वैसे ही  वह दुनिया को अपने शहीद पिता से मिलवाए। शहीद मेजर पद्मपनी आचार्य आज जिंदा होते तो इस साल अपना 50वां बर्थडे मना रहे होते।ये साल उनके परिवार के लिए इसलिए ज्यादा खास है।इसी साल जनवरी में अपराजिता ने पापा पर एक कॉफीटेबल बुक तैयार करने का फैसला किया।लॉ स्टूडेंट  अपराजिता  जब इंटर्नशिप  ब्रेक  के  लिए अप्रेल में घर आई तो इस किताब के काम पर जुट गई।मई और जून मिलाकर कुछ डेढ़ महीने  का समय मिला और  उसने पूरी बुक  तैयार 

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