भारतीय सेना ने निष्क्रिय किए 14 साल से जमीन में दफन 555 जिंदा बम, इस तरह से पूरा किया मिशन

भारतीय सेना के बम निरोधक दस्ते ने जमीन में दबे 555 जिंदा बमों को निष्क्रिय कर दिया है। यह बम ऊधमसिंह नगर के जसपुर में 14 वर्ष से दबे हुए थे। यह बम वर्ष 2004 में इराक से आए स्क्रैप में आ गए थे। इस स्क्रैप को काशीपुर स्थित एक स्टील फैक्ट्री के प्रबंधक ने दिल्ली के एक कबाड़ डीलर से खरीद लिया था।

मध्य कमान की काउंटर एक्सप्लोजिव डिवाइस यूनिट के बम निरोधक दस्ते ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से ऊधमसिंह नगर के जसपुर गांव में जमीन में गड़े 555 बमों एवं विस्फोटकों को निष्क्रिय कर दिया है। 12 अक्तूबर से इन्हें निष्क्रिय करने का काम शुरू किया गया था।

यह काम 21 अक्तूबर को पूरा किया गया। बम निरोधक दस्ते ने ऊधमसिंह नगर में फीका नदी के किनारे और हाजिरो गांव के निकट दस दिन में इन बमों को निष्क्रिय किया। दस्ते में एक सैन्य अधिकारी सहित एक जूनियर कमीशंड अधिकारी और 12 जवान शामिल थे। वर्ष 2004 में इराक से 16 कंटेनर लाए गए थे, इनमें से एक-दो कंटेनरों में अतिविस्फोटक एवं खतरनाक सामग्री मौजूद थी।
योजनाबद्ध तरीके से बम किए निष्क्रिय इस स्क्रैप में 555 जिंदा बम भी मौजूद थे। यह बम खाड़ी युद्ध के दौरान के थे। इन विस्फोटकों को एसडी स्टील फैक्ट्री काशीपुर ने दिल्ली स्थित तुगलकाबाद के कबाड़ डीलर से खरीदा था।

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दिसंबर 2004 में एसडी स्टील फैक्ट्री में विस्फोट के दौरान फैक्ट्री के मजदूरों की मौत हो गई थी। इसके बाद इन बमों को जमीन के अंदर गाड़ दिया गया था। जिला प्रशासन ने सेना से इन बमों को निष्क्रिय करने के लिए पत्र भेजा था।

बम निरोधक दस्ते ने बमों को छोटे-छोटे हिस्सों में विस्फोट कर निष्क्रिय किया। ताकि इस दौरान यहां के लोगों, वन्य जीवों और संपत्ति को क्षति न पहुंच सके।सुरक्षित एवं योजनाबद्ध तरीके से काउंटर एक्सप्लोजिव डिवाइस यूनिट के कमान अधिकारी कर्नल विनय बहल के निर्देशन में पूरा काम किया गया।

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